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Amritam - Praveshikafavoriteshare
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Author: डॉ. भास्करानंद: बिडालियाBind: PaperbackISBN: 9789387486003Year: 2020Page: 120
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व्याख्या :

संस्कृत पाठमाला प्रवेशिका, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमश: पंचम, षष्ठ, सप्तम एवं अष्टम कक्षाओं के लिए हैं। यह पुस्तक श्रृंखला राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुरूप माध्यमिक कक्षाओं हेतु विकसित की गई है। इसका उद्देश्य संस्कृत-भाषा के प्रति रूचि उत्पन्न कराने के साथ-साथ उसके संरचनात्मक स्वरूप का प्रारम्भिक बोध करना है। 

विशेषताएं :

  • सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा का प्रयोग। 
  • छात्रों के बौद्धिक स्तर के अनुरूप पाठ्यवस्तु का चयन। 
  • संस्कृत भाषा एवं साहित्य की मूल भावना का परिचयात्मक बोध कराना।
  • चित्रों की सहायता से रुचिकर विषयवस्तु का प्रस्तुतीकरण। 
  • भाषा के चारो कौशलोंश्रवण, पठन, लेखन एवं भाषण का पर्याप्त अवसर प्रदान करना। 
  • व्याकरणिक तत्वों का सहज एवं सरलता से बोध करना। 
  • प्रत्येक पाठ में प्रश्नों का विवेचन तथा विविध प्रकार की प्रश्नावली का समावेश। 
  • सरल श्लोकों द्वारा संस्कृत भाषा की विविधता एवं नैतिक चेतना आदि से अवगत कराना। 


लेखक :

डॉ. भास्करानंद: बिडालिया एम.ए. (संस्कृत), बी.एड., पी.एच.डी. (संस्कृत) विगत कई वर्षों से शिक्षण-प्रशिक्षण का लेखन अनुभव। 

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व्याख्या :

संस्कृत पाठमाला प्रवेशिका, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमश: पंचम, षष्ठ, सप्तम एवं अष्टम कक्षाओं के लिए हैं। यह पुस्तक श्रृंखला राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुरूप माध्यमिक कक्षाओं हेतु विकसित की गई है। इसका उद्देश्य संस्कृत-भाषा के प्रति रूचि उत्पन्न कराने के साथ-साथ उसके संरचनात्मक स्वरूप का प्रारम्भिक बोध करना है। 

विशेषताएं :

  • सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा का प्रयोग। 
  • छात्रों के बौद्धिक स्तर के अनुरूप पाठ्यवस्तु का चयन। 
  • संस्कृत भाषा एवं साहित्य की मूल भावना का परिचयात्मक बोध कराना।
  • चित्रों की सहायता से रुचिकर विषयवस्तु का प्रस्तुतीकरण। 
  • भाषा के चारो कौशलोंश्रवण, पठन, लेखन एवं भाषण का पर्याप्त अवसर प्रदान करना। 
  • व्याकरणिक तत्वों का सहज एवं सरलता से बोध करना। 
  • प्रत्येक पाठ में प्रश्नों का विवेचन तथा विविध प्रकार की प्रश्नावली का समावेश। 
  • सरल श्लोकों द्वारा संस्कृत भाषा की विविधता एवं नैतिक चेतना आदि से अवगत कराना। 


लेखक :

डॉ. भास्करानंद: बिडालिया एम.ए. (संस्कृत), बी.एड., पी.एच.डी. (संस्कृत) विगत कई वर्षों से शिक्षण-प्रशिक्षण का लेखन अनुभव। 

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